आज संसार में सर्वाधिक दु:खी प्राणी यदि कोई है तो वह है गाय। हमारे सभी धर्मिक ग्रंथो में गौमाता को सर्वोच्च स्थान प्रदान किया गया है और गौवंश को भारतीय संस्कृति का आधार माना है। हमारे पूर्वजो ने गाय के शरीर में 33 करोड़ देवताओं का निवास बताया है। गौरक्षा के लिए कई आंदोलन हुए है और आंदोलन चल रहे है। कई गौभक्त शहीद हो गये है। कई संत गौहत्याबंदी के लिए दिन-रात प्रयासरत है। कई संतो के जीवन का उद्देश्य ही एकमात्रा गौरक्षा ही है। हजारों गौशालाएं चल रही है। गौरक्षा का इतना व्यापक प्रयास होने के बावजूद भी आज गौहत्याएं जारी है। हजारों कत्लखाने सरकारी अनुमति और अनुदान पर ध्ड़ल्ले से चल रहे है। प्रतिवर्ष लाखो टन गौमांस का निर्यात हो रहा है। ऐसा क्यों ?

ऐसा इसलिए कि हमें देसी गाय की आर्थिक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्व की सही-सही जानकारी नहीं है। वर्तमान शिक्षा के पाठ्यक्रमों में भी गौमाता के बारे में जानकारी नहीं है, जिसे पढ़कर विद्यार्थी अपना ज्ञानवधर्न कर सके। जब तक बच्चों को देशी गाय के दूध्, दही, घी, गोबर और गौमूत्रा के महत्व की आर्थिक और वैज्ञानिक दृष्टि से उपयोगिता की सही-सही जानकारी नहीं होगी, तब तक बच्चे गौमाता से दूर ही रहेगें।
वर्तमान समय में गौमाता की ऐसी विकट स्थिति में ‘भगवान राम द्वारा श्रीलंका विजय के लिए बनाये जा रहे पूल निर्माण में गिलहरी के योगदान स्वरूप’ ‘भारतीय गौविज्ञान परीक्षा’ के इस लघु प्रयास से हम विद्यार्थियों को देशी गौवंश की आर्थिक और वैज्ञानिक दृष्टि से उपयोगिता की सही-सही जानकारी कराने में सपफल होगें। हमारे इस प्रयास को आपके आत्मीय सहयोग की आवश्यकता है। कृपया अधिकाधिक सहयोग प्रदान करें।

गाय का दूध पीला क्यों होता है? गाय का घी पीला क्यों होता है? दस ग्राम गाय के घी से हवन करने पर कितनी आWक्सीजन बनती है? गौमूत्र का क्या उपयोग है? गोबर से क्या लाभ है? यज्ञ हवन में देशी गाय का घी ही क्यों काम में लिया जाता है? इनके उपयोग के पीछे वैज्ञानिक कारण क्या है? आदि कई प्रकार की छोटी-छोटी बातें आप, हम और बच्चे नहीं जानते है। जबकि हमारे पूर्वजों ने गौमाता को भारतीय संस्कृति का आधार मानते हुए उसमें 33 करोड़ देवताओं का निवास माना है। गौमाता को माँ का दर्जा दिया हैं। हम इस परीक्षा के माध्यम से विध्यार्थियों और उनके परिवार जनो को गौमाता के बारे में कई प्रकार की नई-नई जानकारिया देने में सपफल हो सकेगें। इस परीक्षा में अब तक लगभग 5 लाख परीक्षाथियों ने भाग लिया है। इस परीक्षा के बाद कई परिवारों ने गाय को बेचने का मन बदल कर घर-घर में गौपालन शुरू कर दिया।


देशी गाय का दूध् पीला क्यों होता है? देशी गाय का घी पीला क्यों होता है? दूध्, घी के पीलेपन का वैज्ञानिक कारण क्या है? यज्ञ हवन में देशी गाय का घी क्यों काम में लिया जाता है? देशी गाय के दस ग्राम घी से हवन करने पर कितनी आक्सीजन बनती है? आदि कई प्रकार की छोटी-छोटी बातें आप, हम और बच्चे नहीं जानते है।
विद्यार्थियों को इस परीक्षा के माध्यम से गौमाता के बारे में इस प्रकार की कई महत्वपूर्ण जानकारियॉ हो सकेगी। इस परीक्षा में आपका सहयोग विध्यार्थियों में गोसेवा के प्रति जागरूकता, और गौउत्पादों की उपयोगिता के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ गौवंश को बचाने में भी सहायक सिद्ध होगा। भारतीय संस्कृति की आधर ‘गौमाता’ के लिए यह परीक्षा अत्यन्त महत्वपूर्ण और आवश्यक है। इसलिए आपसे विनम्र प्रार्थना है कि आप-
  • अपने विध्यालय के सभी छात्र-छात्राओ को इस परीक्षा में सम्मिलित करे|

  • अपने आस-पास के अन्य विध्यालयो को भी इस परीक्षा से जोड़ने का प्रयास करे|

  • अपने सभी शिक्षको (स्टाफ) को भी इस परीक्षा में सम्मिलित करे|

  • निजी विध्यालय सत्रारंभ पर प्रवेश फीस के साथ ही इस परीक्षा का शुल्क जमा कर सकती हे|

  • सक्षम निजी विध्यालय अपने कोष से इस परीक्षा का आयोजन कर सकती हे|

  • अपने संपर्क में आने वाले अन्य प्रधानचार्यो और विध्यालय संचालको से भी इस परीक्षा आयोजन हेतु आग्रह करे|

  • शिक्षादान को सर्वश्रेष्ठ 'दान' माना गया है,परन्तु 'गौशिक्षा का दान' तो उससे भी कई गुना अधिक 'सर्वश्रेष्ठ' हे |

हमारे इस 'गौरक्षा' के जन-जागरण अभियान को आपके आत्मीय सहयोग की पूरी-पूरी अपेक्षा हे, कृपया अधिकाधिक सहयोग प्रदान करावे| यही आपसे अनुरोध और निवेदन है|
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